सोमवार, 8 फ़रवरी 2016

श्रीमती मोनिका पुरोहित : मूक बधिर बच्चों के शिक्षण प्रशिक्षण व् पुनर्वास का कार्य


इंदौर में जन्मी  और  स्थापित  मोनिका  की कहानी  किसी फ़िल्मी कथा में सुपर हीरो की एंट्री की तरह है। सन् 2000  में  अखबार में मेट्रोमोनियल साईट पर भोपाल के ज्ञानेंद्र पुरोहित  ने विज्ञापन दिया की ऐसी लड़की जो मूक और बधिर लोगो के लिए सोशल वर्क करने की  इच्छुक हो  केवल वही अपना बायो डेटा भेजे।  ज्ञानेंद्र पुरोहित  के बड़े भाई मूक बधिर थे और उनकी एक दुर्घटना में मृत्यु के कारण ज्ञानेंद्र व्यथित थे।  मोनिका ने ज्ञानेंद्र के जीवन में प्रवेश इसी उददेश के साथ लिया की उनको अब  सारा जीवन मूक बधिरों की सेवा व सहायता करते हुए बिताना है। लोगो ने मोनिका को ताने मारे की वो अच्छी खासी HR की पोस्ट छोड़कर गूंगे बहरो के बीच अपना जीवन बर्बाद करना चाहती हैं।  मोनिका ने बिना  किसी बात पर विचलित हुए  मूक बधिर विषय पर  B ed  व  M ed  कर लिया और सन्  2000 में  पति द्वारा स्थापित "आनंद सर्विस सोसाइटी"   में इन लोगो के लिए कार्य करना पारम्भ कर दिया।  मोनिका मूक व बधिरों को शिक्षित करने का कार्य करने लगीं।  
                      2006  में  एक 17  बर्षीय मूक बधिर युवती के 3 वर्षीय पुत्र की उसकी गोद में ही हत्या कर दी गयी।  युवती बेहद डरी हुई व व्यथित थी इस घटना ने मोनिका को हिलाकर रख दिया।  मोनिका ने उस युवती और पुलिस के बीच ट्रांसलेटर का काम किया और न्याय पाने में उसकी सहायता की। इसके साथ ही मोनिका ने अपने पति के साथ मिलकर  इंदौर में भारत के पहले " एम पी  मूक  बधिर  पोलिस केंद्र " की स्थापना की और पोलिस कोर्ट व मूक बधिरों  के बीच   एक ट्रांसलेटर की तरह कार्य करना आरम्भ कर दिया।   मध्य प्रदेशमें इस केंद्र के हेल्प  लाइन सेंटर स्थापित होने लगे। मोनिका की एक छोटी सी पहल ने बड़ा रूप ले लिया और जल्दी ही लगभग 356  केस रजिस्टर्ड हुए।  भारत के लगभग ७८ लाख मूक और बधिर इस सेवा के आरम्भ होते ही लाभान्वित होने लगे।  मोनिका को कोर्ट ने व पोलिस ने "साइलेंट लेंगुएज एक्सपर्ट " के रूप में अडॉप्ट कर लिया और सम्प्पूर्ण भारत से उनको पोलिस व कानून की मूक बधिर मामलो से सम्बंधित  कार्रवाहियों में  सहायता के लिए बुलाया जाने लगा।  मोनिका के पति ज्ञानेंद्र ने कोर्ट कचहरी के मामलो में स्वयं को सशक्त बनाने के लिए वकालत कर डाली और मोनिका अब अपने पति  की सहायता से मूक बधिर लोगो के केस भी लड़ने लगीं । मूक बधिर लड़कियों के गेंग रेप जैसे मामलो में बहुत बार जान की धमकी मिलने पर भी मोनिका पीछे नहीं हटीं और उनको न्याय दिलवाया।  
             
2010 में मोनिका ने अलीराजपुर से 65 मूक बधिर ढूंढ निकाले जिस जिले की  लिट्रेसी मात्र 21% थी। अब मोनिका का उद्देश्य  मूक बधिरों की सहायता करना व उनको शिक्षा देना नहीं रह गया था बल्कि वो इन लोगो को समाज में स्थापित भी कर देना चाहती थी।  इसलिए उन्होंने भारत सरकार के सामने अन्य भाषाओँ की तरह "साइलेंट साइन लेंगुएज " को भी आधिकारिक तोर पर भारत की अन्य भाषाओँ में शामिल किये जाने की पहल की।  उन्होंने वंदे मातरम " राष्ट्रीय गीत को साइन लेंगुएज में मूक व बधिरों के लिए कम्पोज़ किय। साथ ही राष्ट्रीय गीत "जन गन मन " को भी अपने पति श्री ज्ञानेंद्र के साथ मिलकर कमोज किया और प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया।  अमिताभ बच्चन ने एक टीवी शो में स्वयं आगे आकर मोनिका व उनके प्रयासों को सराहा और मोनिका के कार्यो से प्रेरणा  पाकर मूक बधिरों  की साइलेंट लैंग्वेज में उनके लिए गीत प्रस्तुत किया।  हर साल मोनिका की आनंद संस्था मूक व बधिर लोगो का एक परिचय  सम्मेलन  आयोजित करवाती है जो अंधे, मूक व बधिरों को सामान्य वैवाहिक जीवन जीने के लिए   प्रेरित करती है।  
              2016  में मोनिका के भागीरथी प्रयासों  को  राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया और मोनिका भारत की प्रथम 100 सशकत महिलाओं में शामिल की गईं।  समाज से व सम्पूर्ण राष्ट्र से उनके  कार्यो को ढेर सारे सम्मान  व पुरस्कार प्राप्त हुए  . मोनिका आज भारत  के इन मूक बधिर नागरिकों को उनका सम्मान और पहचान दे देने के  लिए अनवरत कार्य कर रहीं हैं।  जो कभी मोनिका व उनके प्रयासों का मज़ाक बनते थे आज मोनिका को एक सितारा बनकर चमकते हुए देख रहे हैं।




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पोस्‍ट-ग्रेज्‍युएट डिग्री ली है अर्थशास्‍त्र में .. पर सारा जीवन समर्पित कर दिया ज्‍योतिष को .. अपने बारे में कुछ खास नहीं बताने को अभी तक .. ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना .. बस सकारात्‍मक सोंच रखती हूं .. सकारात्‍मक काम करती हूं .. हर जगह सकारात्‍मक सोंच देखना चाहती हूं .. आकाश को छूने के सपने हैं मेरे .. और उसे हकीकत में बदलने को प्रयासरत हूं .. सफलता का इंतजार है।